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90 साल के बाद न्यूयॉर्क लाइब्रेरी में लौटी किताब, जिसने लेट फीस के रूप में होने वाली वसूली की रकम से सबको चौंका दिया

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एक ऐतिहासिक घटना ने न्यूयॉर्क की एक पुरानी पुस्तकालय को हलचल में डाल दिया है। यह घटना 90 साल बाद वापस लौटी गई एक पुरानी किताब के आस्तित्व को लेकर है, जो लार्चमोंट पब्लिक लाइब्रेरी से चेक आउट होने के बाद अपने आप में एक अनूठी कहानी बना रही है।

1925 में लिखी गई जोसेफ कॉनराड की ‘यूथ एंड टू अदर स्टोरीज़’ नामक पुस्तक की एक प्रति, जो 1933 में लार्चमोंट पब्लिक लाइब्रेरी से इशू की गई थी, ने इस पुरानी पुस्तकालय को रौंगत में डाल दी है। यह किताब करीब 90 सालों के बाद वर्जीनिया की जोनी मॉर्गन ने मिली और इसके बारे में जानकर वह लाइब्रेरी से संपर्क की।

इस अद्वितीय घटना में सबसे बड़ी बात यह है कि इस किताब को लेट फीट के तौर पर चेक आउट होने पर लाइब्रेरी ने केवल $5 वसूल किए हैं। इस नई तकनीक ने इस कहानी को एक नए मोड़ पर ले जाने में मदद की है, जिससे यह साबित होता है कि पुरानी किताबों की महत्वपूर्णता हमेशा बनी रहती है।

रिपोर्ट के अनुसार, लार्चमोंट लाइब्रेरी के उद्घाटन के बाद इस किताब की चेक-आउट तिथि ने इसे शहर की सबसे लंबी चेक-आउट रिकॉर्ड बना दिया है। लाइब्रेरी अध्यक्ष कैरोलिन कनिंघम ने बताया कि जिस व्यक्ति ने किताब ली थी, वह उस समय गांव में रहता था और उसे लौटाने का समय नहीं मिला। इस अद्वितीय हादसे ने लाइब्रेरियन को भी हैरान कर दिया, क्योंकि उन्हें भी ऐसा करना नया था। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी ने किताब लौटाने वाली महिला के साथ हुई कॉल के बारे में सुनकर उन्हें पहले तो यह लगा कि क्या यह सही लाइब्रेरी है या नहीं, क्योंकि उन्हें वर्जीनिया से बहुत सारे फोन कॉल्स मिलते हैं, जिसका कारण वह व्यक्ति गलत लाइब्रेरी से कॉल कर रहा है, क्योंकि वर्जीनिया में एक लार्चमोंट लाइब्रेरी है।

इसी बीच, 1978 में इस किताब को इशू करने वाले जिम्मी एलिस की मौत हो गई थी। जिम्मी एलिस गांव में अपनी पहली पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहे थे। उनकी सौतेली बेटी ने एक पत्र के माध्यम से बताया कि उनका घर लार्चमोंट पब्लिक लाइब्रेरी से लगभग दो ब्लॉक की दूरी पर था। जिम्मी को लेखक और पठन के रूप में जाना जाता था और उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाई में प्रेरित किया, इसलिए वे संभवतः नियमित आधार पर लार्चमोंट पब्लिक से किताबें उधार लेते थे।

By पलानीपन मयप्पन